Saturday, October 20, 2012

जीवन पथ ....

देहरादून/ दून घाटी  मुसूरी  मार्ग से मेरे द्वारा  खींची गयी  तस्वीर 



मुक्ति मार्ग की  इस उलझन में 
क्षणभंगुर  यौवन  घर में
बंजारे  का कौन ठिकाना
दूर बहुत है  मुझको जाना,,,,,,

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खेल खिलौने  मीत सलोने 
रूठे पल छिन  सावन झूले

सागर मे भरी सीपें जितनी

भूली बिसरी यादे  कितनी ??
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तारों भरी वो रात सुहानी
ना जाने फिर कब हैं  आनी..
आँख   से बहता  झरझर  पानी
  गुजर गयी कब  रात सुहानी    ??
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जन्म  मृत्यु अंतहीन कहानी  
सृष्टि चक्र  की  बात पुरानी
आँखों मे जी भरकर  भरलूं
प्रियतम  तेरी  छवि  सुहानी  !!
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शास्वत चलते  काल चक्र में 
थके पथिक  का   क्या भरमाना

अंतर्मन  का सूर्य अस्त  हो 
  कल जाने  फिर कब हो आना ??
दूर बहुत है मुझको जाना ....
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श्रीप्रकाश डिमरी  जोशीमठ  उत्तराखंड भारत 
१८  अक्टूबर  २०१२  फोटो साभार  गूगल....



13 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

दूर बहुत है मुझको जाना .... बहुत सुंदर रचना

Mamta Bajpai said...

गहरे भाव समेटे सार्थक रचना

डॉ. मोनिका शर्मा said...

उत्कृष्ट रचना...... जीवन का कुछ ऐसा ही क्रम है.....

प्रवीण पाण्डेय said...

हर नये सूर्योदय के साथ और चलने की प्रेरणा..

रविकर said...

बहुत सुन्दर |
भाई जी-
बड़े दिनों बाद आप की पोस्ट देख पाया |
सादर -

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

अंतिम पैरा बहुत प्रभावशाली लगा सर!


सादर

kshama said...

अप्रतीम रचना!

रश्मि प्रभा... said...

शास्वत चलते काल चक्र में
थके पथिक का क्या भरमाना ... क्रम को टूटना कहाँ है !

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 25-10 -2012 को यहाँ भी है

.... आज की नयी पुरानी हलचल में ....
फरिश्ते की तरह चाँद का काफिला रोका न करो ---.। .

Dr.NISHA MAHARANA said...

bhut badhiyaa abhiwyakti ...dil khush ho gaya .....

Kuldeep Sing said...

सुंदर भाव... कभी आना... HTTP://WWW.KULDEEPKIKAVITA.BLOGSPOT.COM

Kuldeep Sing said...

सुंदर भाव... कभी आना... HTTP://WWW.KULDEEPKIKAVITA.BLOGSPOT.COM

अनामिका की सदायें ...... said...

utkrisht rachna.