Thursday, April 22, 2010

नव यौवन ...

फ़रवरी२०१० हरिद्वार कुम्भ  मेले में  गंगा जी  के तट  मेरे ( श्रीप्रकाश  डिमरी)  द्वारा स्वयं  खींची  गयी  तस्वीर
उड़ रहा था
उन्मुक्त मैं नील गगन मे..
भरता था जहाँ यौवन रस ..
स्वर्ण कलश मेरे तन मे ..
आह !!! प्रिये !!!
तुम दीप लिए ..
.सांझ सकारे
आन खड़ी हो ...
मेरे द्वारे ..
आओ आओ
नव यौवन दाता ....
मेरे उर को
चिर आनंद से ..
हर्षित कर जाओ
स्वागतम  स्वागतम !!
प्रतीक्षारत था मैं तुन्हारी
मेरी अनन्य प्रियतम.....
जहाँ कभी.....
बिछुड़ा था तुमसे
साथ चलूँगा मुस्कुराते
थामे हाथ तुम्हारा ...
प्रेम गीत गाते....
उस अनंत शुभ्र तम में ..
जहाँ खिलेंगे...
किसलय और नव पुष्प ...
आओ  प्रिये  !!! ....
चलें  उसी  पार .....
भूले   बिसरे...
अपने....
  शाश्वत  और ...
सुन्दर से उपवन में .........
........स्वरचित श्रीप्रकाश डिमरी १५ अप्रैल २०१०
प्रकृति के सुकुमार चितेरे कवि श्री चंद्रकुंवर सिंह बर्त्वाल( १९१९ -१९४७ )
को समर्पित ....

7 comments:

डॉ. नूतन - नीति said...

ye kavita me chhupa rahsya aur darshan...bahut sundar dhang se sri prakash ji aapne aatmaa rupi Premikaa ka milan ishwar se saanj roopi jiwan ki sandhyaa me karvaya hai... bahut hee gehre darshan ke saath aapki kavita... bahut sundar... shubhkamnaayen...

jaha tak mujhey lagta hai ye photo bhi aapki hee khinchi hogi.. sundar photo aur vaisee hee kavitaa...

डॉ. नूतन - नीति said...

Kya aapki ye kavita me apne blog main share kar sakti hoon... ?

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुन्दर प्रस्तुति

अनुपमा पाठक said...

sundar rachna!

Travel Trade Service said...

आओ प्रिये !!! ....
चलें उसी पार
भूले बिसरे...
अपने....
शाश्वत और ...
सुन्दर से उपवन में ......बहुत सुन्दर जी ...मन मैं दबी बात सुन्दर तरीके से उदगमन होती हुई !!!!!!!!!!!

babanpandey said...

दिल को छू गई

रंजना said...

सुन्दर भावाभिव्यक्ति...